अनुसंधान आकलन पर सैनफ्रांसिस्को घोषणा

शैक्षणिक संस्थान, वित्तपोषण एजेंसियां और अन्य समुदाय द्वारा, वैज्ञानिक अनुसंधान के शोध-परिणाम का मूल्यांकन करने के तरीकों को बेहतर बनाने की अत्यावश्यकता है। इस मुद्दे को हल करने के लिए, 16 दिसंबर, 2012 को सैनफ्रांसिस्को में अमेरिकन सोसाइटी फॉर सेल बायोलॉजी की वार्षिक बैठक के दौरान प्रतिष्ठित पत्रिकाओं के संपादकों और प्रकाशकों ने मुलाकात की । इन्होंने कुछ सिफारिशें तैयार की हैं, जो अनुसन्धान मूल्यांकन की सैनफ्रांसिस्को घोषणा के नाम से जाना जाता है। हम इस घोषणा के समर्थन करने के लिए विज्ञान के सभी सम्बद्ध विषयों के लोगों को आमंत्रित करते हैं कि वे अपना नाम इसके समर्थन में दर्ज करें।

वैज्ञानिक अनुसंधानों के विभिन्न परिणाम होते हैं जैसे, नवीनतम ज्ञान, आँकड़े, अभिकर्मक एवं सॉफ्टवेयर का उल्लेख करनेवाले वैज्ञानिक लेख; बौद्धिक संपदा; एवं उच्च प्रशिक्षण प्राप्त युवा वैज्ञानिक। वित्तपोषण संस्थाएं, वैज्ञानिकों को नियुक्त करनेवाली संस्थाएं, और स्वयं वैज्ञानिक, सभी वैज्ञानिक अनुसंधानों के परिणामों की गुणवत्ता एवं प्रभाव को जाँचने की इच्छा एवं आवश्यकता महसूस करते हैं। इसीलिए यह अनिवार्य हो जाता है कि वैज्ञानिक परिणामों का सटीक आँकलन एवं समझदारी से मूल्यांकन किया जाये।

वैज्ञानिक पत्रिकाओं के इम्पैक्ट फैक्टर को बहुधा व्यक्तियों एवं संस्थाओं के अनुसन्धान परिणामों के आँकलन के लिए मुख्य मापदण्ड के रूप में निरंतर उपयोग किया जाता है, जबकि वैज्ञानिक पत्रिकाओं के इम्पैक्ट फैक्टर, जिसकी गणना थॉम्पसन रॉयटर्स द्वारा की जाती है, को शुरू-शुरू में एक ऐसे साधन के रूप में विकसित किया गया था, जिससे पुस्तकालय में खरीदी जानेवाली पत्रिकाओं के चयन में आसानी हो, न कि किसी वैज्ञानिक लेख की गुणवत्ता मापने के लिए। इस बात को ध्यान में रखते हुए यह समझना बहुत आवश्यक है कि पत्रिकाओं के इम्पैक्ट फैक्टर का अनुसन्धान के आँकलन हेतु उपयोग करने पर इसमें कई प्रामाणिक कमियां हैं। ये हैं: अ) विभिन्न पत्रिकाओं में उद्धरण का वितरण एक समान नहीं है [1-3]; आ) पत्रिकाओं के इम्पैक्ट फैक्टर उनके क्षेत्र-विशेष पर निर्भर करता है। इसमें बहुविध एवं  विभिन्न प्रकार के लेख, जिनमें मूल लेख तथा समीक्षात्मक लेख सम्मिलित हैं, का मेल होता है, [1, 4]; इ) पत्रिकाओं के इम्पैक्ट फैक्टर से सम्पादकीय नीतियों में बदलाव करके छेड़छाड़ (या “चालबाज़ी”) की जा सकती है [5]; और ई) पत्रिकाओं के इम्पैक्ट फैक्टर की गणना करने के लिए उपयोग किये गए आँकड़े न तो पारदर्शी हैं और न ही सार्वजनिक रूप से उपलब्ध हैं [4, 6, 7]। वैज्ञानिक अनुसंधानों के परिणामों की गुणवत्ता को और बेहतर ढंग से परखने के लिए हमने निम्न सिफारिशें प्रस्तुत की हैं। भविष्य में वैज्ञानिक लेखों से अतिरिक्त अन्य परिणामों का महत्व अनुसन्धान के प्रभावों को जाँचने के लिए बढ़ेगा, लेकिन सह विषय विशेषज्ञों द्वारा समीक्षित अनुसंधान लेख अनुसन्धान की गुणवत्ता मापने के लिए मुख्य भूमिका में बना रहेगा। इसिलए हमारी सिफारिशें मुख्य रूप से विशेषज्ञों द्वारा समीक्षित पत्रिकाओं में प्रकाशित वैज्ञानिक लेखों की कार्यप्रणाली पर केंद्रित रहेंगी, लेकिन इनमें अतिरिक्त परिणामों जैसे, डेटा के समूह को अन्य महत्वपूर्ण उत्पाद के रूप में सम्मिलित किया जा सकेगा। ये सिफारिशें वित्तपोषण संस्थाओं, शैक्षिक संस्थाओं, पत्रिकाओं, सूची उपलब्ध करनेवाली संस्थाओं तथा शोधकर्ताओं को ध्यान में रखकर बनाये गए हैं।

इन सिफारिशों में कई विषय निहित हैं:

  • वित्तपोषण, नियुक्ति एवं पदोन्नति के संबंध में पत्रिका-आधारित-मैट्रिक्स जैसे, इम्पैक्ट फैक्टर प्रयोग बंद करना;
  • अनुसन्धान का आँकलन उसकी अपनी योग्यता के आधार पर करना न की उस पत्रिका के आधार पर, जिसमें वह शोध प्रकाशित हुआ हो; तथा
  • ऑनलाइन प्रकाशन से मिलने वाले अवसर का लाभ उठाया जाए (जैसे कि लेखों में शब्दों, चित्रों तथा सन्दर्भों की अनावश्यक सीमा को और लचीला किया जाये तथा अनुसन्धान की महत्ता और प्रभाव के आँकलन हेतु नए सूचकों की खोज की जाये)

हम जानते हैं कि अनुसन्धान के मूल्यांकन के लिए बहुत-सी वित्तपोषण अभिकरण, संस्थाएं, प्रकाशक, एवं शोधकर्ता पहले से ही उन्नत मापदंडों के उपयोग को प्रोत्साहित कर रहे हैं। इन प्रयासों से अनुसन्धान के मूल्यांकन के लिए धीरे-धीरे और परिष्कृत व सार्थक विधियों का निर्माण हो रहा है, जिसे अब वैज्ञानिक समाज को स्वीकार करना चाहिए।

अनुसन्धान आकलन पर सैनफ्रांसिस्को घोषणा हेतु हस्ताक्षर कर सहमत होनेवाले लोग अनुसन्धान के आकलन के लिए निम्नलिखित तरीकों को अपनाने का समर्थन करते हैं।

सामान्य सिफारिशें

१. किसी शोध लेख या किसी शोधार्थी के वैज्ञानिक योगदान के आँकलन के लिए अथवा किसी वैज्ञानिक की नियुक्ति, पदोन्नति एवं वित्तपोषण संबंधी निर्णयों के लिए इम्पैक्ट फैक्टर जैसे पत्रिका-आधारित मानकों का इस्तेमाल नहीं करेंगे।

वित्तपोषण संस्थाओं के लिए

२. अनुदान के लिए चुने गए आवेदकों की वैज्ञानिक क्षमता के मूल्यांकन में प्रयोग किये गए मापदंडों को स्पष्ट करें, विशेषकर शोधार्थी के शुरूआती दिनों में तथा इस बात पर विशेष ज़ोर दें कि शोध पत्र का विषय अधिक महत्वपूर्ण है न कि प्रकाशन सूचना या उस पत्रिका की प्रतिष्ठा, जिसमें लेख प्रकाशित हुआ है।

३. अनुसन्धान के आँकलन के लिए शोधपत्रों के साथ-साथ सभी प्रकार के शोध-परिणामों (जिनमें डेटा समूह तथा सॉफ्टवेयर भी सम्मिलित हों), को ध्यान में रखें तथा एक बहु-आयामी पद्धति को अपनाया जाये, जिसमें अनुसन्धान की गुणवत्ता के सूचक, जैसे योजना एवं अभ्यास को प्रभावित करने की क्षमता, शामिल हों।

संस्थाओं के लिए

४. नियुक्ति, कार्यकाल एवं पदोन्नति-निर्णय के मूल्यांकन में प्रयोग किये गए मापदंडों को स्पष्ट करें, विशेषकर शोधार्थी के शुरूआती दिनों में तथा इस बात पर विशेष ज़ोर दें कि शोध पत्र का विषय अधिक महत्वपूर्ण है न कि प्रकाशन सूचना या उस पत्रिका की प्रतिष्ठा, जिसमें लेख प्रकाशित हुआ है।

३. अनुसन्धान के आँकलन के लिए शोधपत्रों के साथ-साथ सभी प्रकार के शोध-परिणामों (जिनमें डेटा समूह तथा सॉफ्टवेयर भी सम्मिलित हों), को ध्यान में रखें तथा एक बहु-आयामी पद्धति को अपनाया जाये, जिसमें अनुसन्धान की गुणवत्ता के सूचक, जैसे योजना एवं अभ्यास को  प्रभावित करने की क्षमता, शामिल हों।

प्रकाशकों के लिए

६. पत्रिका की उन्नति को बढ़ावा देने के लिए इम्पैक्ट फैक्टर जैसे तंत्रों का प्रयोग घटाया जाये, आदर्श परिस्थितियों में इम्पैक्ट फैक्टर को बढ़ावा देने को बिल्कुल बंद करते हुए तथा इसे पत्रिका-आधारित अन्य सूचकों के संदर्भ में, जैसे पंचवर्षीय इम्पैक्ट फैक्टर, आइजेन फैक्टर [8], SCImago [9], h -index, संपादकीय और प्रकाशन का समय इत्यादि, को प्रस्तुत करते हुए किया जाये ताकि पत्रिका की उपलब्धि के बारे में बेहतर जानकारी प्राप्त हो सके।

७. विभिन्न प्रकार के सूचकों को उपलब्ध कराया जाए, जिससे शोध-लेखों का आँकलन उनकी वैज्ञानिक विषयवस्तु के आधार पर किया जाये न की उस पत्रिका की प्रतिष्ठा के आधार पर, जिसमें शोध पत्र छपा हो।

८. नैतिक लेखकत्व को बढ़ावा दें तथा प्रत्येक लेखक के विशिष्ट योगदान की जानकारी उपलब्ध कराने के प्रावधान बनायें।

९. किसी शोध-पत्र में दर्ज संदर्भ सूचियों का पुनःप्रयोग करने की अनुमति दी जाये, चाहे वे मुक्त रूप से प्राप्त होने वाली (ओपन-एक्सेस) अथवा अंशदान-आधारित (सब्सक्रिप्शन-बेस्ड) पत्रिकाओं में प्रकाशित हुआ हो तथा उन्हें क्रिएटिव कॉमन्स पब्लिक डोमेन डेडिकेशन के अंतर्गत लाया जाये [10]।

१०. शोध-पत्रों में सन्दर्भों की संख्या पर लगी पाबन्दी को समाप्त किया जाये या इसे और लचीला बनाया जाये, और, यदि उचित हो तो, समीक्षा के हित में मौलिक लेखों के उद्धरण को अनिवार्य बनाया जाये ताकि प्रथम खोजकर्ताओं को उनका श्रेय मिल सके।

सूचियाँ उपलब्ध करानेवाली संस्थाओं के लिए:

११. सभी सूचियों की गणना करने की विधियों एवं आंकड़ों को पारदर्शी एवं स्पष्ट रखें।

१२.  आंकड़ों को अप्रतिबंधित प्रयोग की छूट के अधिकार-पत्र के अंतर्गत उपलब्ध कराया जाये तथा, जहाँ भी संभव हो, आंकड़ों पर कम्प्यूटेशनल पहुँच प्रदान करें।

१३. स्पष्ट करें कि सूचियों के साथ किसी भी तरह की अनुचित छेड़छाड़ नहीं करने दिया जायेगा; अनुचित छेड़छाड़ को समुचित परिभाषित किया जाये और ऐसा होने से रोकने के लिए उठाये जानेवाले कदमों की समीक्षा भी स्पष्ट रूप से की जाये।

१४. सूचियों का प्रयोग, संकलन तथा तुलना करते समय शोध-पत्रों के प्रकार (जैसे समीक्षा अथवा शोध लेख) तथा विभिन्न विषय-क्षेत्रों का हिसाब रखा जाये।

शोधकर्ताओं केलिए:

१५. किसी समिति के सदस्य के रूप में वित्तपोषण, नियुक्ति, कार्यकाल एवं पदोन्नति के संबंध में निर्यण लेते समय पत्रिकाओं के मूल मैट्रिक्स की अपेक्षा वैज्ञानिक उपलब्धियों को ध्यान में रखा जाये।

१६.  अपने शोध-पत्रों में समीक्षात्मक लेखों के बजाय मौलिक लेखों का ही उद्धरण करें, जिसमें तथ्यों को पहली बार खोजा गया हो, जिससे मूल खोजकर्ताओं को उनका उचित श्रेय मिल सके।

१७. अपने प्रकाशित लेखों के प्रभाव तथा उनकी पहुँच के विषय में व्यक्तिगत अथवा सहायक टिप्पणी करते समय प्रमाण के रूप में विभिन्न लेख सूचियों एवं सूचकों का प्रयोग करें [11]।

१८. अनुसन्धान आँकलन की ऐसी अनुपयुक्त कार्य-प्रणाली का विरोध करेंगे, जो पत्रिकाओं के इम्पैक्ट फैक्टर पर आधारित हो तथा विशिष्ट अनुसन्धान-परिणामों के महत्व पर केंद्रित कार्य-प्रणाली को बढ़ावा देंगे और इसके बारे में दूसरों को शिक्षित करेंगे।

ग्रंथसूची

  1. Adler, R., Ewing, J., and Taylor, P. (2008) Citation statistics. A report from the International Mathematical Union.
  2. Seglen, P.O. (1997) Why the impact factor of journals should not be used for evaluating research. BMJ 314, 498–502.
  3. Editorial (2005). Not so deep impact. Nature 435, 1003–1004.
  4. Vanclay, J.K. (2012) Impact Factor: Outdated artefact or stepping-stone to journal certification. Scientometric 92, 211–238.
  5. The PLoS Medicine Editors (2006). The impact factor game. PLoS Med 3(6): e291 doi:10.1371/journal.pmed.0030291.
  6. Rossner, M., Van Epps, H., Hill, E. (2007). Show me the data. J. Cell Biol. 179, 1091–1092.
  7. Rossner M., Van Epps H., and Hill E. (2008). Irreproducible results: A response to Thomson Scientific. J. Cell Biol. 180, 254–255.
  8. http://www.eigenfactor.org/
  9. http://www.scimagojr.com/
  10. http://opencitations.wordpress.com/2013/01/03/open-letter-to-publishers
  11. http://altmetrics.org/tools/

*  जर्नल इंपैक्ट फैक्टर अब क्लारिवेट एनालिटिक्स द्वारा प्रकाशित किया गया है|


This is a translation of the DORA text at https://sfdora.org/read, contributed by Prashant Yadav and Jadeesan A.K. and made available under the terms of the Creative Commons Attribution International License. We are very grateful to the volunteers who have produced and checked the translations of the declaration. Errors might occasionally occur and if you do spot one, please contact info@sfdora.org.